
2020 में पालघर में तीन साधुओं की लिंचिंग के मामले में सीबीआई जांच के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हरी झंडी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने मामले को सीबीआई को देने का फैसला किया है, इसलिए अब आगे निर्देशों की जरूरत नहीं। उपरोक्त टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई बंद करते हुए याचीका का निस्तारण कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरन महाराष्ट्र सरकार की ओर से बताया गया कि सरकार मामले को सीबीआई को देने का फैसला कर चुकी है।
इससे पहले महाराष्ट्र की एकनाथ शिंद के नेतृत्व वाली सरकार पहले ही पूरे मामले की सीबीआई जांच को लेकर सहमति जता चुकी है। सरकार ने कुछ समय पहले कोर्ट को इस बारे में जानकारी भी दे दी गई थी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी परदीवाला की पीठ को याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा पिछली सुनवाई राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सहमति दी है।
गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा था कि सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया था कि राज्य की पुलिस पक्षपातपूर्ण तरीके से जांच कर रही है। ये याचिकाएं अलग अलग लोगों के द्वारा दाखिल की गई है। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा, मृतकों के परिजनों, वकील शशांक शेखर झा और घनश्याम उपाध्याय ने जनहित याचिकाएं दायर की हैं।