
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को जोशीमठ में निर्माण पर लगी रोक को सख्ती से लागू करने के आदेश जारी किये है।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले (जोशीमठ त्रासदी) को देखने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों की एक समिति बनाए।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि समिति में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सीईओ पीयूष रौतेला और एमपीएस बिष्ट को जरूर शामिल किया जाए। और साथ ही दो महीने के अंदर सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट पेश करे।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर काफी गंभीर है और जोशीमठ में सभी निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं
जोशीमठ के सभी प्रभावित निवासीयो को संभावित मदद भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन को लेकर राज्य सरकार वाडिया संस्थान के विशेषज्ञों की मदद ले रही है।
12 जनवरी को, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ में ज़मीन के धसने के मुद्दे पर सभी पक्षों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, और भूस्खलन की जांच में जुटे विभिन्न प्रतिष्ठानों के वैज्ञानिक, जिला प्रशासन, पुलिस, और आईटीबीपी कैंप में आवश्यक सेवाओं से जुड़े जिला स्तरीय अधिकारियो से बातचीत की। बातचीत करने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, साथ ही लोगों की सुरक्षा के लिए सभी इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।