
चुनाव आयोग के फैसले के बाद उद्धव ठाकरे को भी सुप्रीम कोर्ट से भी निरिशा हाथ लगी है। सुप्रीम कोर्ट के रुख से साफ है कि शिवसेना और धनुष बाण दोनों ही शिंदे गुट के पास ही रहने वाले हैं। ये भी कहा गया है कि चुनाव आयोग द्वारा उद्धव गुट को जो टॉर्च और मशाल वाला चुनावी चिन्ह दिया गया था, वही आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों उद्धव गुट और शिंदे को नोटिस भी जारी किया है।
कुछ दिन पहले ही चुनाव आयोग ने उद्धव गुट को बड़ा झटका दिया था। आयोग ने शिंदे गुट को ही असल शिवसेना माना था और धनुष-बाण वाला चिन्ह भी शिंदे गुट को आवंटित कर दिया था। निर्वाचन आयोग के इस फैसले को उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी, लेकिन अब वहां से भी अभी के लिए कोई राहत नहीं मिली है। चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखा गया है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान उद्धव गुट की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि 21 जून से पहले पार्टी के अंदर किसी बात को लेकर असहमति या मतभेद नहीं था। असहमति की बात तब पता चलती है, जब ये लोग (शिंदे गुट) असम जाकर बयानबाजी करने लगते हैं। सिब्बल ने सवाल किया कि बागी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं, बहुमत का आनंद लेते हैं। और फिर पाला बदल लेते हैं। सदन की सदस्यता किसी की निजी संपत्ति नहीं है, जो वह व्यापार करने लगा जाए?