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11वीं की छात्रा को 34 बार चाकू मारने वाले हत्यारे को कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा, कहा- यह निर्भया जैसा केस

गुजरात की राजकोट की एक अदालत ने 11वीं क्लास की छात्रा को 34 बार चाकू घोंप कर मारने वाले शख्स को मौत की सजा सुनाई है। नाबालिग लड़की ने इस शख्स का प्रस्ताव ठुकरा दिया था, जिसके बाद उसने गुस्से में आकर लड़की पर चाकू से लगातार हमला कर मौत के घाट उतार दिया था।

घटना के वक्त जब लड़की के भाई ने उसे बचाने की कोशिश की, तो आरोपी ने उस पर भी हमला किया। मामला दो साल पहले, यानी मार्च 2021 का है, जिस पर कोर्ट ने अब फैसला सुनाया है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज आरआर चौधरी की कोर्ट ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की श्रेणी में रखा है। दोषी का नाम जयेश सरवैया है। उस पर आईपीसी और पोक्सो एक्ट के कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। पब्लिक प्रॉसिक्यूटर झनक पटेल के मुताबिक कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302 के तहत आरोपी को मौत की सजा सुनाई और 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इस मर्डर ने पूरी समुदाय को झकझोर कर रख दिया था, इसलिए कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। हालांकि कोर्ट ने दोषी को अपील दायर करने के लिए एक महीने का समय दिया है।

आरोपी शख्स और सृष्टि नाम की लड़की जेतपुर में जेतलसर गांव के रहने वाले थे। आरोपी युवक लड़की को लंबे समय से परेशान कर रहा था। 16 मार्च 2021 को वह उसके घर प्रस्ताव लेकर गया। सृष्टि ने उसका शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया तो वह आगबबूला हो गया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।

भागने की कोशिश करने पर सृष्टि घर के बाहर ठोकर खाकर गिर पड़ी और जैसे ही वो गिरी जयेश ने उस पर चाकू से वार करना शुरू कर दिया। उसने 34 बार सृष्टि को चाकू से घोंपा और उसके भाई को भी चाकू से जख्मी कर दिया। हत्या करने के बाद वो खून से सने कपड़े पहने हुए और हाथ में चाकू लेकर बाजार से निकला पर किसी ने उसे पकड़ने की कोशिश नहीं की।

पब्लिक प्रॉसिक्यूटर झनक पटेल ने बताया कि सृष्टि पर किया हर वार ऐसा था जिससे एक इंसान की जान ली जा सकती थी। इसलिए जयेश ने सिर्फ सृष्टि नहीं, बल्कि 34 लोगों की हत्याएं की है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान 51 गवाहों की गवाही ली जा चुकी है। उस वक्त पुलिस की तरफ से कोर्ट में 200 से 216 पेज की आरोपत्र भी दाखिल हुआ था। कोर्ट ने कहा नजर में सृष्टि रायणी हत्याकांड निर्भया कांड से भी ज्यादा संगीन और दर्दनाक है।

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About the Author: Meera Verma

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